मुखड़े 

सुंदर हैं जिनके मुखड़े
अन्दर हैं कितने दुखड़े
ये कौन जनता है।
दिखने में जो हंसी हैं
लगने में जो जवां हैं
अन्दर की किस घुटन से
वो हो चुके हैं बुड्ढे
ये कौन मानता है।
– राजेंद्र

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