Singing Minstrels in my city

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Just like the Bauls in Bengal, and the Keertankaars in the Marathwada region, singing minstrels were a common sight in North Indian towns and cities until about three decades ago; then they vanished. Driven away by the security and safety paranoia of cities, and the allegations such as theft, these people moved to the hinterlands and were no longer seen singing on buses, trains, footpaths, or sometimes even outside temples. Covid pushed them further away. Was surprised to see them on the street this morning. I love how they mix Bhakti texts with film tunes and their simple choir-style singing. *I am still learning to edit videos. All geeks are welcome to teach.

दुनिया परछाइयों की

THE WORLD OF HINDI CINEMA

और सब भूल गए हर्फ़-ए-सदाक़त लिखना
रह गया काम हमारा ही बग़ावत लिखना

  • हबीब जालिब

अगर आप शिराज़ हुसैन उस्मानी की कला, उनकी खताती (कैलिग्राफी), उनके स्टूडियो ‘ख्वाब तनहा’ और उनकी शख्सियत से वाकिफ नहीं हैं तो आप बहुत कुछ मिस कर रहे हैं। अपनी क्रीऐटिवटी और अपने हुनर से कल शाम शिराज़ साहब ने महफ़िल लूट ली। मौका और नुमाइश (‘दुनिया परछियों की’) तो हिन्दी सिनेमा के फिल्म पोस्टर, गीत पुस्तिकाएं, लॉबी कार्ड और बड़े छोटे परदे पर चलती तस्वीरों की थी पर शिराज़ हुसैन के बनाए परदों पे थिरकते हर्फों नें देखने वालों पर ना सिर्फ जादू कर दिया पर वो आज के माहौल पर एक तबसरा भी हैं ।

जाने माने फिल्म इतिहासकार और कला क्यूरेटर आशीष राजाध्यक्ष ने इस प्रदर्शनी को पुराने फिल्मी पोस्टरों, लॉबी कार्ड, थिएटर के अंदर का माहौल बना कर मल्टी-मीडिया के इस्तेमाल सिनेमा के प्रेमियों के लिए खास तरीके से पेश किया है। यह प्रदर्शनी रोजमर्रा की भारतीय जिंदगी में सिनेमा की अमूर्त उपस्थिति को उजागर करती है।

अर्थशिला दिल्ली में लगी “दुनिया परछाइयों की” प्रदर्शनी “भारतीय सिनेमा के सच्चे सिनेप्रेमियों के लिए है। हिन्दी सिनेमा 21वीं सदी के भारत में सबसे बड़े सांस्कृतिक प्रभावों में से एक रहा है। प्रदर्शित पोस्टर 70, 80 और 90 के दशक की सिनेमाई स्मृति को याद करते हैं।”

प्रदर्शनी 27 सितंबर 2025 से 4 जनवरी 2026 तक रहेगी। बेहतरीन, ज़रूर देखिए। बाकि जानकारी @arthshila_delhi

Pishauri and Lahori

पिशौरी ते लाहोरी

पिशौरियों और लाहौरीयों की मुहब्बत के कई किस्से मशहूर हैं; हाय हाय, ऐसे हैं के सुनाये नहीं बनते। ऐसी मुहब्बत के मौका मिले तो ये दोनों तो एक दूसरे को घर तक छोड़ कर आते हैं; काटने या कूटने से भी नहीं बख़्शते ये। मुक़ाबले भी ख़ूब करते हैं — महीन और सूफियानी चमड़ी वाले लाहौरीयों नें कसूर में ऊँटनी (डाची) की नर्म खाल से ज़नाना जुतियाँ बनाई तो पिशौरियों ने मोटी जिल्द वाले जनावरों और ट्रक टायर से मर्दाना सैंडल बना दिये। एक पुश्तैनी लाहोरी ने जब पिशौरी सैंडल पहनने की गुस्ताखी की तो शाम तक उसके पैरों का हाल आप देख सकते हैं। ‘ये जख्म थोड़े ही हैं ये तो प्यार के थपेड़े हैं’। लो भाई लो, ले लो वापिस, इतना प्यार नहीं चाहिए मुझे। कोहलापुरी ठीक है। वैसे ये कोई हल्दी रसम नहीं हो रही है और जब से मैंने फोटो खींची है पिशौरन तो मुँह फुलाए बैठी है।  

महाभारत के कौरवों वाले कुरु वंश की राजमाता गांधारी इसी इलाक़े से बताई जाती हैं। पिशौर के गांधार मैदानों में ही पली बढ़ी होंगी। खैबर दर्रे को जाने वाली वादी में बसा पेशावर शहर गांधार के महकते मैदानी इलाके के लिए जाना जाता है। तीन तरफ़ पहाड़ों से घिरे गांधार के मैदानों और पहाड़ियों में कभी हजारों बौद्ध भिक्षु गुफाओं और मठों में रहते थे। सिकंदर के फ़ौजियों की एक टुकड़ी रास्ता भटक यहीं आ गई थी जिन्होंने भिक्षुओं को बुद्ध की मूर्तियाँ तराशना सिखाया। उधर दूसरी तरफ उत्तर पूर्व वाले लाहौर से एक सड़क (मुग़ल रोड) मरी और रावलपिंडी होते हुए हिमालय की काराकोरम और पीर पंजाल शृंखला तक ले जाती है। मरी की पहड़ियाँ भी गांधार सी हसीन हैं जो अपने यहाँ बनी शराब से पेशावर को टल्ली कर देती हैं। एक तरफ भक्ति रस तो दूसरी तरफ सोमरस। 

feet with ulcers or boils induced by shoes
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Ruskin Bond, happy birthday

Mr Bond, we started early. This was 1996. Bonding with you, your writing since then. Wishing you good health, joy, and a happy birthday, Ruskin Bond. Keep writing and keep spinning that charm. You have been kind to me, to us, with signed copies of almost all your works. The first book that you signed for me here at the British Book Fair at the British Council, still smells of your touch. This is the bonding of stars @Shashank.

#Ruskin Bond  

Ruskin Bond signing a copy of his book for Shashank Arora at the British Book Fair in Delhi.