मौसम / यादें / गीत

तुम आते तो सैर को चलते
मौसम कितना अच्छा है
तुम आते तो बातें करते
मौसम कितना अच्छा है?

तुम आते तो चाय भी चलती
बारिश, बातों, यादों संग
तुम आते तो पूरे करते
कविता में वो छूटे रंग

तुम आते तो फिर से गाते
सावन का वो भूला गीत
तुम आते तो पींग बढ़ाते
वही पुराने दोनों मीत

हाय! 
तुम आते तो हुक्का भरते
या फिर चिलम माल से भरते
बेबी ज़ीनत के गाने सा
हरे रामा हरे कृष्णा करते

तुम आते तो फोन लगाते
उसी पुराने नंबर पर
बढ़ जाती दिल की फिर धड़कन
हैलो बोलती जब दिलबर

तुम आते तो फिर दोहराते 
ख़ुसरो ग़ालिब मीरा मीर
फैज़ मजाज़ की नज़्मे कहते
बांचते पूरी रात कबीर

तुम आते तो फिर से चलते
ख्वाजा दास चचा को मिलने
खटिया पे बैठे अधलेटे
लाल शुक्ल ‘दरबारी’ सुनने 

तुम आते तो फिरकी भरते
ग्रामोफ़ोन की सूई बदलते
वही पुराना तवा चढ़ा कर 
दादा निखिल बनरजी सुनते  

तुम आते तो छत पे चलते
ठुमरी के जहाँ बोल थरकते 
बड़े गुलाम अली के सुर में 
“याद पिया की आये …” सुनते  

तुम आते तो यादें बुनते
कच्चे उधड़े दिल सी लेते  
तारे गिनते रात रात भर
कुछ मर लेते कुछ जी लेते। 

तुम आते तो सैर को चलते
मौसम कितना अच्छा है
इस बारिश की भीगी बूँदे
कुछ भर लेते कुछ जी लेते 

क्या जाने फिर मिलना हो ना 
जी भर के सावन पी लेते

तुम आते तो सैर को चलते। 

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