तकसीम से पहले जिस घर में वो रहते थे उसे ढूंढने हम अपने वाल्दैन के साथ लाहौर गए। अब्बा मरहूम की फेरिस्त में दूसरे नंबर पे हीरा मंडी जाना लिखा था, और वो गए । वो शेखुपुरा में पैदा हुए थे पर बचपन ग्वाल मंडी इलाके में बीता। उनकी और मेरी ज़िन्दगी के वो यादगार दिन थे।
