यक़ीनन ये सपना ही है
और सपने में तुम हो
सामने जो पसरे हैं ना
तुम्हारे गेसू हैं
काले घने मस्त शराबी
कभी नहीं देख पाया मैं इनके पार
और वो
जो पीछे से झाँक रहा है न
वो, वो तुम्हारा
झुमका ही है
कुछ और हो ही नहीं सकता
इतना सुनहरी
इतना खूबसूरत
या तो ये तुम हो
या मेरा वहम
– रा
Sunrise over Mukteshwar hills, Uttarakhand. 6 November 2022
