कौन गाएगा अब  ‘सारे जहाँ से अच्छा हिन्दोस्ताँ हमारा’

एक दिन ग़र्क़ न कर दे तुझे ये सैल-ए-वजूद
देख हो जाए न पानी कहीं सर से ऊँचा

फ़ज़ा इब्न-ए-फ़ैज़ी

” दग़ा करे वो किसी से तो शर्म आए मुझे ”

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