केशनिखार तेल की पुरानी सीसी तक
अब उसका हाथ नही पहुंचता।
कोने में धक दी गई है
चौड़े, खुले दांतो वाली मोटी कंघी
जिसे महीनों से छुआ भी नहीं गया।
सुकड़ा सा एक काला हेएर बैंड
मुंह फुलाए पुराने टूथ ब्रश से लिपटा है।
माँ से अब बाल नहीं बनाये जाते
ना ही धोया जाता है सर, हर इतवार।
तेल लगाना कवायद है अब
ना ही छुड़ाए जाते हैं गाँठ पड़े
बालों के गोल गुच्छे ।
नब्बे की उम्र में भी सर बालों से भरा है
आधे सफ़ेद और यकीन मानो, बाकि आधे काले
हाँ काले, बिना किसी खिजाब
शिकाकाई, रीठे और आवंले के ।
“आज शैम्पू कर लेते हैं,”
में कहता हूँ। वो सोचती है।
मैं पूछता हूँ, “मैं बना दूँ बाल ?”
वो और सोचती है।
“देसी साबुन से सर धोती थी मैं,
गज़ भर लम्बे बाल थे मेरे
गोड़े-गोड़्यां तक, पता ऐ ?”
इस पे वो अब भी इतराती है।
बायाँ कंधा अब हिलता नहीं है
वो बाज़ू गले भर तक ही उठता है,
दाहिने से बाल पकड़ नहीं पाती।
कंघी नहीं कर पाती, तो खीजती है
हताश हो, मछली सी सर पटक देती है
और गुस्साती है अपने ही अक्स पर
शीशे के दूसरी तरफ। कुछ बुदबुदा
मुँह फेर लेती है, और फेंकती है पीछे
कंधे से चिपके गीले बालों को।
पिलपिले कच्चे ग़ुलाबी मसूड़े से
नहीं खोल पाती बालों की सूई का मुँह
जैसे तैसे टाँक लेती एक इस तरफ
तो दूसरी उस तरफ। निहारती है
आईने में खुद को या “उसे”
टेढ़ी नज़र से बाहर देखती है
शर्माती मुँह छुपा लेती है गीले दुप्पटे में
बुढ़ाता तो शरीर है
सोच तो बाईस पे रुक जाती है।
माँ ने मान लिया है, सब झंझट ख़त्म
अब होगा बॉब कट।
29 May 2024
