कुछ तो रिश्ता होगा
पतंग और पेड़ का !!!
जड़ और उड़ान का
डोर और डाल का
पत्तों और झोल का
कुछ तो रिश्ता होगा ! 

कुछ तो इश्क़ होगा
ऊँचे-ऊँचे उड़ने में
कटने और जुड़ने में
हवा से लिपटने में
पाखियों से मिलने में।
कुछ तो रिश्ता होगा
पतंग और पेड़ का?
कौन लिपट रहता है ऐसे
कौन हो रहता है तुम्हारा
और बना लेता है
अपनी ही डोर का फंदा।
कुछ तो रिश्ता होगा !!
25 August 2018
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