मुखड़े 

सुंदर हैं जिनके मुखड़े
अन्दर हैं कितने दुखड़े
ये कौन जनता है।
दिखने में जो हंसी हैं
लगने में जो जवां हैं
अन्दर की किस घुटन से
वो हो चुके हैं बुड्ढे
ये कौन मानता है।
– राजेंद्र

Necropsy

Her tender skin sprouts
green shoots
a wreath,
at the foot of tree
she was buried.

On the trunk
her face appeared, a
morphed stump.

The bark, her coffin
split, where demons clawed.

A number, worms out
indelible scars, 452.

Frozen chambers of mortuary
await the next,
a child, a girl, a dalit, a musalman.
A cattle herder.
Or, the silent you, you and you.

 

To the 8 year old Kathua girl, durgged, raped and murdered.

 

ये आवाजें

ये आवाजें
तुम्हारे रास्तों की
मोहताज़ नहीं,
बंद करके जिन्हें,
महफूज़ कर लिए हैं
तुमने अपने मक़ा।
शहर की हर
गली से, नाके से
लोह-बंद मोर्चों से टकराकर
हवा में गूंजती
तूफ़ान सी बिखर जाएँगी
कहर ढायेंगी, तुम्हारे डेरों  पे ।
सुन लो इन्हें !!!
ये जो कहती हैं !!!
हैं तुम्हारे भी घर पर
बहन – बेटियाँ .

रंग 

हर काली करतूत का रंग
काला नहीं होता –
रंग :
सरकार का – बेपरवाह मैल्ला, बदरंग
पुलिस का – निर्दयी खाखी
बलवाइयों का – जलते धुंए सा सलेटी
हत्यारों का – सुर्ख लाल
बलात्कारी का – नपुंसक सफ़ेद