कुल दो मिनट

कुल दो मिनट में करना है इन्हे 

अपनी भूख का इंतज़ाम 

भूखे पेट और डर के बीच में हैं 

रेल की दो पटरियां 

नीले वर्दी वाले गार्ड का डंडा 

और कुछ गिद्ध नज़रें   

दो मिनट में लाँघने हैं इन्हें  

16 ड़िब्बे 128 खिड़कियां 

और शर्म के हज़ारों पहाड़ 

कुल दो मिनट में ढूंढ़ना है 

कलुआ वेटर, जो लेता है  

जूठन से भरी पन्नियां के बदले

तीनों की दो दो पप्पी  

हल्द्वानी स्टेशन पर 

कुल दो  मिनट ही रूकती है 

दिल्ली से आयी शताब्दी एक्सप्रेस   

तीन बहने 

दो मिनट 

एक रेल गाड़ी 

– रा 

Platform number 2 of Haldwani railway station, November 5, 2022

​​इदरीस की ​दूकान बंद है ​

​माैसम सर्द हो रहा है
आज तो हवा भी चल रही है
धूप भी कभी निकलती है, कभी नहीं
तुम्हारे बारे में सोच रहा था
तुम्हे, जिसे ​​इदरीस की चाय बहुत पसंद है
ठंडे मौसम में इधर मत चली आना
​​इदरीस की ​दूकान बंद है ​
​सोचा तुम्हें बता दूं
​तुम्हें मालूम नही होगा
​कैसे पहुँचती ख़बर तुम तक
कल रात ही तो
कल रात ​इदरीस गुज़र गया ​
कल रात उसने शायद यहीं बितायी ​
मेरी तरह
मैं यहीं हूँ
​दूकान के बाहर
इंतज़ार कर रहा था तुम्हारा ​
​कल रात से

  • रा 26 नवंबर 2022

इदरीस की याद में जो 80 के दशक में रामजस कॉलेज की दीवार के साथ लगे खोखे से चाय बेचता था और इसी तरह के सर्द मौसम में गुज़र गया। 

सपना

यक़ीनन ये सपना ही है 

और सपने में तुम हो 

सामने जो पसरे हैं ना 

तुम्हारे गेसू हैं 

काले घने मस्त शराबी 

कभी नहीं देख पाया मैं इनके पार

और वो 

जो पीछे से झाँक रहा है न 

वो, वो तुम्हारा     

झुमका ही है 

कुछ और हो ही नहीं सकता 

इतना सुनहरी 

इतना खूबसूरत 

या तो ये तुम हो 

या मेरा वहम 

– रा 

Sunrise over Mukteshwar hills, Uttarakhand. 6 November 2022

Sunrise over Mukteshwar hills, Uttarakhand. 6 November 2022

चतुर्भुज स्थान

कितनी प्रार्थनाएँ 

कितनी कामनाएँ 

कितने सवाल 

कितने दुःख 

कितने कष्ट 

कितने पाप 

कितने संताप 

छोड़ आते हैं लोग 

पीपल के हवाले। 

अरिया भंगन उन सब को 

ख़ुशी-ख़ुशी समेट लाती है –

चढ़ावे के फूल, चावल, गुड़, 

लाल धागों और किनारी लगे 

दुपट्टों के साथ। 

अरिया भंगन  

फिर से कर आती है 

साफ़-शफ़्फ़ाफ़ पाक 

पीपल का मैला चौराहा

जहाँ से एक रास्ता 

चतुर्भुज स्थान को जाता है। 

– रा, 19 नवम्बर