सपनों में दुश्मन हमबिस्तर हो जाता है। 

सपनों में
कोई भी चला आता है 
जाना अनजाना 
दोस्त दुश्मन 
चोर साध 
कभी बेखटक
कभी छुप कर  
बिन बुलाये 
बिन बताये 
सपनो का अँधेरा 
सब सोख लेता है 
डर धोखा छल । 

सपनों में
धुंधला जाते हैं चेहरे     
जैसे शीशे पे फिसलती 
पानी की बूंदों के परे    
मायावी छलावी बिम्ब। 
नामालूम, अपने पराये।  
अधखुली आँखों से 
पहचान नही पाते हम  
दुश्मन का कपट रूप। 

सपनों में
हम समझ नहीं पाते 
दुश्मन का  
सम्मोहन मंत्र 
कमज़ोर और निर्बल
हम देख नहीं पाते 
उसका वशीकरण जाल 
निर्जीव निद्रा में   
वो करता है हठ संभोग। 

सपनों में
ढाल के परे 
हम देख नहीं पाते
दुश्मन के भाव 
उसके पैंतरे 
और अस्र शस्त्र। 

सपनों में
दुश्मन 
छुपा लेता है अपने 
नुकीले खंजर और 
झूमती कुचलती चाल।  

सपनों में 
हम बेबस हो जाते हैं 

सपनों में 
हम लड़ नहीं पाते 
दुश्मन से 

सपनों में 
वो हमसे 
चालाकी कर 
प्यार जताने लगता है 

सपनों में दुश्मन 
हमबिस्तर हो जाता है। 

दुश्मन सरीख़े 
सपने क्यूँ नहीं आते 
दिन के उजाले में 
खुली आँखों के सामने 

Teen – Three

वो बस तीन कपड़ों में आयी थी। .. देखो, बस तीन।  1 – 2  और 3 

India Art Fair 2022, Delhi. Artworks: Mahbubur Rahman. Title: Imagine. (this picture caption is my imagination).

मैं क्या जी  !!

मैं क्या जी  !!
ज़रा बैठो मेरे कोल
कदी बोलो मिठे बोल  
हाय, नेड़े ते आओ 
ज़रा बुल तां हिलाओ  
इक गल मानोगे !
मनोगे ना ?

मैं क्या जी !!
इक पल रुको ना 
गल मेरी वि सुणो 
ज़रा सुंणो ना 
चलो अज 
बार चलिए 
चलोगे ना ?

मैं क्या जी !!
वेखो ना मेरे वल  
एदर जी 
मैं पीछे आँ जी      
रब माफ़ करे 
मेरी जूण तरे 
मेरे नाल चलो 
लोकी तकदे ने 
मेते हसदे नें 
नाल चलोगे न जी ?

मैं क्या जी !!
की गल ऐ 
ऐनी चुप क्योँ 
दसो न 
कुझ ते बोलो 
दसो न 
नहीं दसोगे ?
दसोगे ना ?

मैं क्या जी !!
किथे चले ओ ?
ज़रा ठेरो ते सई   
कुझ दसो ते सई 
लगा इत्र फुलैल  
जांदे किस वल हो  
मेरी सौतन वल
ओस कंजरी कोल? 

मैं क्या जी !!
ऐ की क्या जे 
या अल्लाह 
की क्या तुसी ?
ना मेरे हाणिया 
सब चंगा जे न 
मुड़ एंज न कयो
फेर ना कदे बोलीं 
ऐ जये अप्सब्द 
मेरी मनेंगां न तू ?

मैं क्या जी !!
दसो होया की ऐ
त्वानू सौं जे मेरी  
रंग फ़क क्यों  ऐ 
अखां लाल क्यों ने  
उडे वाल क्यों  ने 
हाय ओ रब्बा 
ऐ की ? 
तत्ती वाह न लगे तेनु 
दसो ना 
दासोगे ना?

मैं क्या जी !!
क्यूँ रुस पाए ओ
मेरे बीबेया
ओ मेरे ढोलणा 
तेथों वारी जावां मैं     
मेरे रांझेया  
तेरी हीर बुलेंदी 
तेकू प्यार करेंदी  
भले डुब जावाँ मैं 
पर संग ना छडसां 
तुसी की केन्दे ओ ?

मैं क्या जी !!
जिंद जान मेरी
छड्डो ऐंज ना करो
तुसां नराज़ थी वये ? 
कोई गल ना करेंदे  
कुझ बोलेई ना
कुझ कये वी ते ना 
चलो माफ़ कर दयो 
बस हो गया ना?

30 April 2022

मैं क्या जी !!
चलो नस चलिए 
ऐस सब नालों दूर 
दुनिया तो परे 
चलो चन दे कोल 
चल लुक जाइये 
जिवें बचपन विच 
छुप वैंदे सा अस्सी 
मँजियां दे थले 
दरखतन दे पीछे 
फेर चलोगे ना ?