मेरी माँ मेरी गैंगस्टर (Hindi Edition)

कुछ किताबें के साथ ज़िंदगी के वो पल जुड़े होते हैं जिनमे सिमटी यादें  सिर्फ किताब तक महफ़ूज न रह कर हमे बीती घटनाओं के उस घेरे में बांध लेती हैं जो मार्मिक और बेशकीमती होती है – प्रभात भाई की अनुवादित इस किताब के साथ कई ऐसी यादें और पल जुड़े है। इसमे कोई दो राय नहीं की प्रभात भाई का किया किसी भी किताब का अनुवाद अर्थ और विवेचन से परे उनके अपने शब्दों से किताब के प्रसंग को नया आयाम देते हुए हिन्दुस्तानी भाषा के पढ़ने वालों को अपनी सहजता से बांध लेता है। हालांकि ये किताब तो अभी मेरे हाथ नहीं लगी पर बीते दो साल में प्रभात जी के किये कम-अज़-कम चार किताबों के अनुवाद ने ना सिर्फ पढ़ने वाले को बल्कि उनके लेखकों भी मंत्रमुग्ध किया है। बाज़ किताबें के बारे में ये कह कर बात खत्म नहीं की जा सकती कि भाषा या अनुवाद बेहतरीन है पर मैं अपनी तरफ से जोड़ना चाहूँगा कि ये किताब अब सिर्फ एक मासूम गैंगस्टर की ना रह कर कई दिग्गजों या गैंगस्टरों की हो गई है।  

जब इस किताब का अंग्रेज़ी संस्करण आया था, तब मेरी माँ बीमार थीं, बिस्तर पर थीं, और रजनी ने उन्हें किताब के कुछ भावुक व संवेदनशील हिस्से पढ़कर सुनाए थे। रजनी साथ-साथ उनका अनुवाद भी करती जा रही थी, वो अनुवादित शब्द आज भी मेरे ज़हन में ताज़ा हैं। हालाँकि माँ अब हमारे बीच नहीं हैं, फिर भी मैं उन हिस्सों को अपने मन में दोबारा से ताज़ा करना चाहता हूँ और अब नए सिरे से वही हिस्सा माँ को पढ़कर सुनाना चाहता हूँ, यह कहते हुए कि “यह वो असल और सही अनुवाद है जो आपको सुनाना चाहिए था।” 

नहीं मालूम कि प्रभात भाई बार बार ऐसा कैसे कर पाते हैं पर मूल बात का सही मतलब, आसान और बोलचाली भाषा में समझाने वाला अनुवाद ही उनकी खासियत है जो सब को अच्छा लगता है, वो जिसमें केवल शब्दों को नहीं बदला जाता, बल्कि हिंदी की तहज़ीब में असल शब्दों को ढाल कर, उसके शऊर, लहजे, अदब और अंग्रेजी से आने वाली कहावतों की भाषाई सटीकता का भी वो बखूबी से ध्यान रख लेते हैं। अनुवाद ऐसा ही होना चाहिए जिसे पढ़कर बात बिल्कुल साफ़ समझ आए, भाषा का बहाव तरन्नुम में रहे और पढ़ने में ऐसा लगे कि शब्दों के पीछे कोई धुन बज रही है। अंग्रेजी पढे तो देर हो चुकी अब हिन्दुस्तानी की शहद चखनी बाकी है। प्रभात भाई को मुबारक के साथ – 

​I am waiting to read the translated text of these beautiful and haunting lines from the book, “Tonight I will wander on open roads. Tonight I have some time off, even from my dreams”.

<Pictures courtesy Amazon>

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