ये क्या बात हुई नाना जी, बातें अब नहीं करते हो
आँखों-आँखों में कहते हो, दिल पर सब के लिखते हो
हम से कोई भूल हुई क्या, चुप्पी में क्या कहते हो ?
मन की बात छुपा लेते हो, गुस्सा तुम क्यूँ रहते हो ?
अब तक तो जो भी सीखा है, तुम से सीखा, तुम से सीखा
पढ़ना सीखा, लिखना सीखा, हाथ पकड़ के चलना सीखा
प्यार के संग गुस्सा भी सीखा, ज़िंदा दिल हो जीना सीखा
ताश खेलना तुम से सीखा, नेक ख्याल तुम्ही से सीखा
गाना गाना तुम से सीखा, बात बनाना तुम से सीखा
करना प्यार तुम्ही से सीखा, और बाजार तुम्ही से सीखा
खुश रहना और मेहनत करना, सब कुछ तुमने सिखलाया
सिखला कर इतना सब हमको, खुद तुम चुप क्यूँ रहते हो ?
ये क्या बात हुई नानू तुम, नया नहीं कुछ कहते हो?
मन की बात छुपा लेते हो, गुस्सा तुम क्यूँ रहते हो ?
शब्द तुम्हारे पास बहुत हैं, अभी बचे हैं बहुत से किस्से
कायनात का इल्म भरा जो, कह दो उसमे से कुछ हिस्से
कुछ तो बोलो, हमें सुना दो, सभी फ़साने और तज़ुर्बे
अभी तो बाकी और बहुत है, चुप ऐसे क्यों रहते हो
ये क्या बात हुई नाना जी, किस्से अब नहीं कहते हो
एक बार फिर बोल के देखो, दिल अपना भी खोल के देखो
देखो हम कितने आतुर हैं, क्यूँ नहीं तुम कुछ कहते हो?
ये क्या बात हुई नाना जी, बातें अब नहीं करते हो
आँखों-आँखों में कहते हो, दिल पर सब के लिखते हो।

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