पुरानी दिल्ली — हमारे तारीखी शहर का वह हिस्सा, जिसे मैंने बचपन से “दिल्ली की रूह” के नाम से जाना है।
वो दिल्ली मेरे दिल के एक कोने में सिर्फ़ धड़कती ही नहीं, बल्कि हर बीतते दिन के साथ अपना एक नया चेहरा भी उजागर करती है। इसकी गलियों में हमारा आज भी बसता है और हमारा कल भी। इसकी हवाओं में बेशुमार किस्से तैरते हैं, और इसके हर मोड़ पर एक नई कहानी आपका इंतज़ार करती मिलती है।
बरसों की पढ़ाई, तलाश, यादों और मोहब्बत का नतीजा यह नई किताब है, जिसके ज़रिए मैं पुरानी दिल्ली — या यूँ कहिए शाहजहानाबाद — की खुशबू, उसके लोगों, उसके बाज़ारों, उसकी तहज़ीब और उसकी अनगिनत कहानियाँ आप सबके साथ साझा करना चाहता हूँ। उम्मीद है कि यह सफ़र आपको भी उतना ही अपना लगेगा, जितना मुझे रहा है।
जल्द ही… वाम प्रकाशन से आ रहा है, पढ़ कर हौसला बढ़ाइए - आने तक तस्वीर देखिए और कापी बुक करने के लिए लिंक नीचे दिया है
