High Nose Peak

महीना सितंबर का था पर सुबह खासी ठंडी थी। कल्याणी कैम्प धार के ऊपर बनी एक कुटिया में था। कैम्प के बाहर जल रही गीली लकड़ियों का धुआँ पेड़ों की नीचे वाली शाखों पर अटक कर सो गया था। चाय बनने में वक़्त लग रहा था और सूरज देवता उस घाटी से नादारद थे। सामने खड़े भोज के घने जंगल में बहती हवा की आवाज़ आने वाले मौसम की चेतावनी दे रही थी, हल्की धुंध लगी थी हालांकि खतलिंग ग्लेशियर से आने वाली भीलांगना नदी उस सुबह शांत थी। जंगल के बीच से करीब दो मील की खड़ी चढ़ाई पार कर हमे सहस्त्र ताल के नीचे वाली धार तक किसी तरह शाम से पहले पहुंचना था। अगला पड़ाव तड़ी उड़ियार पर होना था जो कल्याणी से करीब 6 मील ऊपर 14000 फुट पर था। कल्याणी और तड़ी उड़ियार के बीच का हिस्सा टूटते पहाड़ और गिरती फिसलती चट्टानों का है ये हमे मालूम था पर ये इल्म नहीं था की ये जनाब (High Nose Peak) उस रोज़ हम सब से खफा थे और अपना इलका पार ना करने देने की ज़िद पर अड़े थे। पहाड़ तो नाराज़ हो सकते हैं पर इंसान नहीं। इन भयानक चट्टानों को पार करना एवरेस्ट वाले हिलरी स्टेप से भी ज्यादा जोखिम वाला काम था। करीब 200 मीटर के इस टुकड़े से पार उतरने में हमे तीन घंटे लगे। दो पोर्टर, मैं और मेरे दो साथी पहले उतर कर पीछे आने वालों को दूर से बता रहे थे कि उतरने का आसान, सीधा और कम खतरे वाला रास्ता कौन सा है। इन साहब की नाक तो देखो ? वाकिया 2003 ट्रेक का है ।  ( सहस्त्र ताल-खतलिंग- मसर ताल-केदार ताल-मयाली पास और ग्लेशियर-वासुकी ताल-केदारनाथ)

Negotiating this granite monster is as difficult, and as risky, as crossing the Hillary’s Step on Mt Everest. One wrong step and that’s it. Plus, this one thumbs its nose at you (look at the shape on top) and makes it mighty difficult to even get a foothold anywhere. Hillary’s Step is just about 40 feet – this obstacle drags on for over 70 feet en route to Sahastra Tal (15,500 ft), a high-altitude glacial lake near Khatling glacier. It took us nearly three hours to clear this. Do you see that ant-like group of humans? Those are my teammates struggling to find a way down while three of us came down another route. This 2003 picture is from a clearing below.